दिल की बात कहने के लिए शीला दीक्षित ने डिटीसी बस में बिताये थे कई घंटे और फिर भी शादी के लिए 2 साल लग गये थे

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अपने काम के दम पर दिल्ली की सूरत बदलने वाली शीला दीक्षित के निधन के बाद समस्त दिल्ली वासी उन्हें उनके द्वरा करवाए गए नेक कार्यो की वजह से याद कर रहा है. शीला दीक्षित ने दिल्ली में आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, फ्लाईओवर, मेट्रो, हरियाली, सीएनजी जैसे कई कामों में सफलता पाकर दिल्ली की जनता का बतौर मुख्यमंत्री बनकर 15 साल तक विश्वास जीता, जिसे शायद दिल्ली की जनता के साथ पूरा देश कभी नहीं भूल सकता. शीला दीक्षित की जिंदगी के कई रोचक किस्से रहे हैं जिसमें से एक उनकी लव स्टोरी भी है. शीला दीक्षित ने अपनी लव स्टोरी के बारे में अपनी एक किताब  ‘सिटीजन दिल्ली: माय टाइम्स, माय लाइफ’ में लिखा है.

शीला दीक्षित ने आयरन लेडी में अपने पहली नजर का प्यार खुलकर लिखा है. शीला दीक्षित ने लिखा कि विनोद उनके पहले और आखिरी प्यार रहे. विनोद से मुलाकात प्राचीन भारतीय इतिहास का अध्ययन करने के दौरान हुई थी और वो पहली मुलाकात ने ही उनके दिल में हलचल बढ़ा दी थी. शीला ने लिखा विनोद उनकी क्लास में 20 स्टूडेंड्स में से सबसे अलग थे.

शीला ने आगे अपनी किताब में लिखा- ऐसा नहीं है कि पहली नजर में ही प्यार हो गया था. वह काफी अलग सा था. मेरी पहली धारणा भी उसके प्रति अलग सी थी. बतौर शीला, पांच फीट साढ़े ग्यारह इंच लंबे विनोद सुंदर, सुडौल, साथियों के बीच बेहद लोकप्रिय और अच्छे क्रिकेटर थे. संयोग से दोस्तों के प्रेम विवाद को सुलझाने के लिए इन दोनों ने मध्यस्थता की थी लेकिन उस पंचायत के चक्कर में विनोद और शीला एक-दूसरे के काफी करीब आ गए.

शीला ने लिखा- वो एक-दूसरे के काफी क्लोज तो हो गये थे लेकिन बात करने से घबराते थे और फिर एक दिन शीला ने उनसे दिल की बात कहने के लिए डीटीसी बस में घंटों विनोद के साथ सफर किया और फिर फिरोजाबाद रोड वो अपनी आंटी के घर विनोद के साथ रुकी. बस में वो कुछ कहे पाती उससे पहले विनोद ने कहा- अपनी मां को बताने जा रहे हैं कि उन्होंने शादी के लिए लड़की चुन ली है, जिससे वो शादी करेंगे. शीला ने तब विनोद से कहा था कि क्या तुमने उस लड़की से दिल की बात पूछी है? तब विनोद ने कहा था कि नहीं, लेकिन वो लड़की बस में मेरी सीट के आगे बैठी है.

अब यहां तक तो सब ठीक था लेकिन शीला के परिवार वाले विनोद के करियर को लेकर थोड़ा सोच में थे कि वो अभी गृहस्थी बसा पायेगा कि नहीं…इस बीच शीला ने मोतीबाग में एक दोस्त की मां के नर्सरी स्कूल में 100 रुपये की सैलरी पर नौकरी कर ली और विनोद आईएएस एग्जाम की तैयारी में लग गए. इन दिनों दोनों के बीच मुलाकात नहीं के बराबर होती थी. एक साल बाद 1959 में विनोद का सेलेक्शन भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के लिए हो गया. उन्होंने यूपी कैडर चुना था.

उसके बाद विनोद ने अपने दादा जी से शीला को मिलवाया और शादी के लिए तैयार किया. जिसके बाद दादा जी ने शीला से कई सवाल पूछे और ये भी कहा कि अभी वक्त लग सकता है क्योंकि विनोद की मां को तैयार करना होगा. इस बीच दो साल बीत गए. आखिरकार 11 जुलाई, 1962 को दोनों की शादी हुई.