ये है मिशन चंद्रयान की असली कहानी जिसे जानना आपके लिए है जरुरी

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क्यों सारी दुनिया भारत के इस स्पेस मिशन पर नज़रे गढ़ाए बैठी है ? इस मिशन को क्यों इतनी इम्पोर्टेंस दी जा रही है? खुद अमेरिका ने एक बार अपने एस्ट्रोनॉड्स चाँद पर उतारे थे लेकिन उसके बाद उसने मुँह फेर लिया और चाँद की तरफ वापस मूड कर नहीं देखा। उस चाँद पर भारत द्वारा भेजा गया स्पेस मिशन चंद्रयान 2 को लेकर क्यों अमेरिकन नासा इतना उत्साहित है ? ये सारे सवाल शायद आपके दिमाग में जरूर घूम रहे होंगे 2008 में चंद्रयान 1 ने नार्थ पोल में पानी के होने की पुष्टि कर दी थी फिर क्यों चंद्रयान 2 का ध्यान साउथ पोल की तरफ केंद्रित किया गया कुछ इस तरह के सवाल भी आपके मन में उठ रहे होंगे। तो आइये इस लेख के जरिये इन सवालो से पर्दा उठाते है।

सबसे पहले बात करते है सवाल न. 1 क्यों अचानक इतने दशकों के बाद स्पेस एजेंसिया चन्द्रमा को लेकर काफी इंटरेस्टेड नजर आ रही है ? जवाब – आजकल स्पेस टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो चुकी है उसमे काफी बदलाव आ गए है जब अमेरिकन एस्ट्रोनॉड ने वहा कदम रखा तब वो सब संभव नहीं था जो आज संभव है। और उस पर चंद्रयान 1 का बर्फ के रूप में पानी की खोज कर देना। यह खोज उतनी ही महत्वपूर्व है जितनी की भारत दवारा विश्व को शून्य देना। चाँद पर पानी मिलना यानि H2O का मिलना। अगर थोड़ी कोशिश की जाये तो इससे हाइड्रोजन भी बनाई जा सकती है और ऑक्सीजन भी। हाइड्रोजन राकेट में ईंधन के रूप में काम आ जायेगा और ऑक्सीजन वहा काम करने वाले एस्ट्रोनॉड के साँस लेने में काम आ सकता है। यानि की पानी है तो चन्द्रमा पर परमानेंट मून बेस बनाने के लिए यह पहला कदम है।

अब आता है सवाल न. 2 आखिर चन्द्रमा पर परमानेंट मून बेस बनाने की जरुरत ही क्या है ? रईसियो को एक और पिकनिक स्पॉट देने के लिए ताकि वो चाँद की सैर कर सके ? जवाब – नहीं नहीं। ऐसा बिलकुल नहीं है ? चन्द्रमा पर हीलियम 3 नामक आइसोटोप बहुतायत मात्रा में उपलब्ध है। जिसका इस्तेमाल कर नुक्लेअर फ्यूज़न रिएक्शन को प्रैक्टिकल संभव किया जा सकता है जिस से इतनी ऊर्जा पैदा की जा सकती है की हमारी ऊर्जा की सारी प्रॉब्लम ख़त्म हो जाएगी। लेकिन वहा से हीलियम 3 को इतनी मात्रा में लाना असंभव सा था लेकिन अब पानी मिल जाने की वजह से अगर वहा पर परमानेंट मून बेस स्थापित हो जाता है तो इस प्रोजेक्ट पर वहा काम किया जा सकता है।

अब आते है सवाल न. 3 पर जब चंद्रयान 1 ने नार्थ पोल पर पानी की मौजुदगी का पता लगा लिया तो फिर चंद्रयान 2 को साउथ पोल पर क्यों उतारा जा रहा है ? जवाब – इसरो ने ऐसा करके बहुत बड़ा जुआ तो खेला ही है क्युकी चाँद के इस भाग का अन्वेषण आज तक दुनिया के किसी भी देश ने नहीं किया है। चन्द्रमा के साउथ पोल पर भारत के रेंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन जायेगा जिसने चन्द्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कराइ हो। साथ ही साउथ पोल को इतना करीब से एक्स्प्लोर करने वाला पहला देश बन जायेगा। लेकिन यह बड़ा कारण नहीं है , चन्द्रमा के साउथ पोल पर ज्यादातर अँधेरा रहता है और चन्द्रमा के इस पोल पर तापमान भी कम है। कम तापमान की वजह से बर्फ की शक्ल में जमा पानी मिलने के ज्यादा चान्सेस है।

आपको बता दे की चंद्रयान 2 रेंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को सबसे उची जगह उतारने की कोशिश करेगा यह सबसे बड़ा कदम होगा इसरो के लिए। अगर चंद्रयान 2 वहा से कुछ ऐसी तस्वीरें भेज दे जिस से हमारे सौर मंडल या चन्द्रमा की उत्पति कैसे हुई इसका अगर कुछ पता चल जाये तो यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। एक और बात वैज्ञानिको ने साउथ पोल पर एक बड़े मेटल ब्लॉक होने की पुष्टि की है। इस शोध क मुताबिक वह पर एक मेटालिक अनोमली के होने की पुष्टि की गई है। तो चंद्रयान 2 साउथ पोल पर उतरना एक बहुत बड़ी उपलब्धि हो सकती है। अब हम सब भारतीयों को को यही उम्मीद लगानी चाहिए की मिशन चंद्रयान 2 सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफल हो और चंद्रयान 2 के मिशन में सफल होने की कामना करनी चाहिए।