आपातकाल: भारतीय इतिहास का काला अध्याय | 1975 Emergency (All You Need To Know)

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भारत की नौजवान पीढ़ी, आज के इस आजादी के माहौल में अपने विचार खुलकर रखती है। सरकार की आलोचना भी करती है, लेकिन एक मिनट के लिए सोचिये अगर ट्विटर, फेसबुक या व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया एप्प पर सेंसर लग जाए। या फिर टीवी पर और अखबार में वही छपे जो सरकार चाहे, कहने का मतलब है कि बोलने, लिखने और सुनने की आजादी पर सेंसर ही लग जाए तो क्या होगा? और आज के दौर की पीढ़ी तप इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकती, क्योंकि ये सब होने पर आज की पीढ़ी की तो जैसे सांसे ही रुक जाएंगी।

मगर जिन लोगों ने 43 साल पहले आपातकाल ( Emergency ) का दौर देखा है वो ही जानते हैं कि तब क्या – क्या हुआ था? हालांकि आपातकाल के चार दशक पूरे हो गए हैं और सब कुछ बदल भी गया है, पर जो नहीं बदली वो हैं इसकी यादें। 43 साल पहले 25 जून 1975 के दिन कुछ ऐसी तस्वीर सबके सामने थी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। 43 साल पहले जब इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल लगाया था तो जुल्म का ऐसा ही दौर चला था कि कोई सोच भी नहीं पाया होगा की आखिर ये हो क्या रहा है। जी हाँ 25-26 जून की दरम्यानी रात 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीने के लिए भारत में आपातकाल घोषित किया गया था।

उस समय का वो दौर इतना भयानक था कि उसे आज भी लोग भूल नहीं पाते। आज भी बहुत से लोग आपातकाल को कांग्रेस की सबसे बड़ी भूल मानते हैं। ये सच है कि उस समय सरकार की नीतियों की वजह से महंगाई 20 गुना बढ़ गई थी। उस दरम्यान देश के जितने भी बड़े नेता थे, सबको सलाखों के पीछे डाला गया था उस समय ऐसा नज़ारा था मानों जेलें राजनीतिक पाठशाला बन गई हों। साथ ही बड़े नेताओं के साथ जेल में युवा नेताओं को भी बहुत कुछ सीखने-समझने का मौका मिला। आपको बता दें कि देश में कानून व्‍यवस्‍था ध्‍वस्‍त होने, बाहरी आक्रमण होने और वित्तीय संकट की हालात में आपातकाल की घोषणा की जाती है।

क्‍यों लगाना पड़ा आपातकाल?
दरअसल मुद्दा ये था कि12 जून, 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने 6 साल के लिए इंदिरा गांधी के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई थी। हाईकोर्ट ने राज नारायण की याचिका पर सुनवाई करते हुए इंदिरा गांधी को दोषी करार दिया था। इंदिरा पर वोटरों को घूस देने, सरकारी मशनरी का गलत इस्तेमाल जैसे 14 आरोप राजनारायण ने अपनी याचिका में लगाए थे। राज नारायण ने 1971 में रायबरेली में इंदिरा गांधी के हाथों हारने के बाद मामला दाखिल कराया था। श्रीमती गांधी ने इस्तीफा देने से इन्कार करते हुए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

24 जून, 1975 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस कृष्ण अय्यर ने इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन इंदिरा को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बने रहने की इजाजत दी। 25 जून, 1975 को जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा के इस्तीफा देने तक देश भर में रोज प्रदर्शन करने का आह्वाहन किया। उन्‍होंने देश के सभी सरकारी एजेंसियों से इंदिरा की तरफ से किसी भी की कार्यवाही करने के आदेश पर अमल करने, इनकार करने की अपील कर चुके थे। इस बात की अपील जयप्रकाश नारायण ने रामलीला मैदान से की थी। उनके इस अपील ने इंदिरा गांधी को हिलाकर रख दिया था। यही कारण है कि 25 जून, 1975 को राष्ट्रपति के अध्यादेश पास करने के बाद सरकार ने आपातकाल लागू कर दिया।

किसे पता था कि एक दिन भारत के इतिहास में काला दिन भी आएगा और इस काले दिन ने पूरे दुनियां में भारत की पहचान एक नये नाम से करवाई थी जिसका नाम था ‘Emergency”।