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दुनिया के सात अजूबे कोन से है आईये जानते

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आधुनिक दुनिया के सात अजूबे पिछले 100 साल से जाने जाते हैं इनमे कुछ अजूबे ऐसे हैं जो पुराने सात अजूबों में अपना स्थान रखते हैं. ये सात अजूबे पुरे दुनिया में कराये गए एक survey के आधार पर चयनित किये गए हैं, जिनको पूरी दुनिया के लोगों ने आश्चर्यजनक माना है. यह पुरे विश्व में अपनी खूबसूरती, मजबूती और कलाकारी के लिए जाने जाते हैं. चलिए अब हम उन सात अजूबों के बारे में जानते हैं.ताजमहल दुनिया के सात अजूबे में से एक ताजमहल है जो भारत के आगरा शहर में स्थित है. पुरे विश्व में ताजमहल अपने ऐतीहासिक महत्व, प्यार की कहानी और शानदार खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है. इस विशाल समाधी को शाहजहां के आदेश से बनाया गया था, जो मुग़ल शासनकाल का पांचवा सम्राट था. उसने इस महल को अपनी प्रिय बेगम की याद में बनाया था। ऐसा कहा जाता है की शाहजहां अपनी बेगम मुमताज से बेपनाह मोहब्बत करते थे, उनकी बेगम की मृत्यु के बाद, अपने प्रेम को इतिहास के पन्नो में हमेसा के लिए यादगार बनाने के लिए उन्होंने ताजमहल बनाने का निर्णय किया जिसे मुमताज का मकबरा भी कहा जाता है।

खुबसूरत कलाकारी के नमूने ताजमहल का निर्माण 1632 में किया गया था जिसे बनने में करीब 15 साल लग गए थे. इसे बनाने के लिए सफ़ेद संगमरमर के पत्थर का उपयोग किया गया था जो काफी मेहेंगा था. यह खुबसूरत सफ़ेद पत्थरों वाला मकबरा चरों तरफ से हरे भरे बगीचों से घिरा है और सामने एक पानी की बारी है जो इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाती है। इस महल की ख़ास बात यह है की यह चरों तरफ से एक सामान दीखता है. ताजमहल के बनने के बाद शाहजहां ने क्रूरता से इस निर्माण में जुड़े सभी मजदूरों के हाथ कटवा दिए ताकि वे ऐसा कुछ दूसरा नमूना ना बना सके. ताजमहल की सुन्दरता को देखने के लिए देश दुनिया से हर साल लाखों पर्यटक आते रहते हैं।

चीन की विशाल दीवार मिट्टी और पत्थर से बना ये किलेनुमा दिवार है जिसे चीन के विभिन्न शाशकों के द्वारा उत्तरीय हमलावरों से रक्षा के लिए 5वी शताब्दी ईसा पूर्व से बनाना शुरू किया गया और 16वी शताब्दी तक बनकर तैयार हुआ. ये दीवार पूर्वी चीन से लेकर पश्चिमी चीन तक फैली है जो चीन की शुरक्षा करती है।इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की इस मानवनिर्मित ढांचे को अंतरिक्ष से भी देख जा सकता है. ये दीवार 6400 किमी के क्षेत्र में फैली है और 35 फ़ीट ऊँची है. इसकी चौड़ाई इतनी है की इसमें 10 लोग आराम से चल सकते हैं. कहा जाता है की इस दीवार के निर्माण में करीब 20 से 30 लाख लोगो ने अपना जीवन लगा दिया था।

चिचेन इत्ज़ा मैक्सिको में स्थित चिचेन इत्ज़ा माया सभ्यता के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है. चिचेन के केंद्र में प्रभावी रूप से स्थित है 79 फीट की ऊंचाई पर बना कुकुल्कन का पिरामिड. इस सीढ़ीदार पिरामिड का आधार चौकोर है।इसके चारों दिशाओं में 91-91 सीढियाँ बनी है और प्रत्येक सीढ़ी को साल के एक दिन का प्रतिक माना गया है और ऊपर बने चबूतरे को 365वा दिन माना जाता है. इसके अलावा चिचेन में चाक मुल के मंदिर, हजार पिलरों का हॉल और कैदियों के लिए बनाये गए खेल के मैदान आज भी देखे जा सकते हैं.माचू पिच्चु दक्षिण अमेरिका के पेरू में माचू पिच्चु नाम का एक शहर है जो जमीन से 2500 फ़ीट की ऊंचाई पर बसा है. ये शहर 15वी सदी में इनकान सम्राट के शाशन काल में बनाया गया था. कहा जाता है की एक समय में ये नगरी संपन्न थी लेकिन स्पेन से आये आक्रमणकारी यहाँ चेचक जैसी भयंकर बीमारी ले आये जिसकी वजह से यहाँ महामारी शुरू हो गयी.इस शहर को लोगों ने चेचक की बीमारी के फैलने की वजह से छोड़ दिया था जिसके वजह से ये शहर बर्बाद हो गया. 1911 में अमेरिका के इतिहासकार हिरम बिंघम ने इसकी खोज की और इसे दुनिया के सामने लाया. UNESCO ने सन 1983 में इसे एक विश्व विरासत में शामिल किया.

कोलोसियम इटली के रोमन कोलोसियम प्राचीन रोम का एक महान अखाड़ा था जिसको लड़ाकों को आपस में लड़ाने और रोमन शासनकाल की महिमा का जश्न मनाने के लिए बनाया गया था. इसका निर्माण तत्कालीन शासक वेस्पियन ने 70वीं ईस्वी के मध्य से प्रारंभ किया और 80वीं ईस्वी में इसको सम्राट टाईटस ने पूरा किया. यह अंडाकार कोलोसियम इतना बड़ा है की इसमें 50 हजार तक लोग इक्कट्ठे होकर जंगली जानवरों और घुलामों की खुनी लडाइयों का खेल देखते थे और इस स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते थे.साल में दो बार भव्य आयोजन होते थे और रोमनवासी इस खेल को बहुत पसंद करते थे. इस स्टेडियम की वास्तुकला ऐसी है की इसका नक़ल करना आज तक इंजिनियरों के लिए ये पहेली बना हुआ है. UNESCO द्वारा इसका चयन विश्व विरासत के रूप में किया गया है. यह आज भी शक्तिशाली रोमन साम्राज्य के वैभव का प्रतिक है.

क्राइस्ट द रिडीमर क्राइस्ट द रिडीमर यानि मसीह उद्धारक जी की मूर्ति ब्राज़ील के रियो डे जेनेरियो में स्थित यीशु मसीह की एक विशाल प्रतिमा है. ये प्रतिमा 130 फ़ीट लम्बी यानि 13 मंजिल ईमारत के बराबर है और 98 फ़ीट चौड़ी है. इस प्रतिमा का वजन 635 टन है. यह तिजुका फारेस्ट नेशनल पार्क में कोर्कोवाड़ो पर्वत की चोटी पर स्थित है जिसकी ऊंचाई समुद्र तट से 2300 फ़ीट है, जहाँ से पूरा शहर दिखाई देता है.ये दुनिया की सबसे ऊँची मूर्तियों में से एक है. ईसाई धर्म के प्रतिक के रूप में ये प्रतिमा रियो और ब्राज़ील की पहचान बन गयी है. ये दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा.

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