सिर्फ 10 मिनट में घुटने हाथ एड़ी और कमर के दर्द को जड़ से खत्म कर देगा ये नुस्खा, आप भी आजमायें |

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आक जिसको मदार, आकड़ा, अर्क, अकद, इत्यादि नामो से जाना जाता है, भारतीय चिकित्सा विज्ञान में अति प्राचीन काल से यह एक दिव्य औषिधि रही है. इसके बारे में एक बात प्रचलित है के यह सूर्य के तेज़ के साथ बढ़ता है और सूर्य के तेज़ कम होते होते इसका प्रभाव भी कम होता जाता है. और बारिश के दिनों में इस पौधे का प्रभाव बिलकुल खत्म जैसा हो जाता है। सूर्य के जितने नाम हैं उतने नाम ही आक के भी हैं.


वैसे तो आक ऐसा कोई रोग नहीं है जिसमे इसका उपयोग ना हो, यह भयंकर से भयंकर रोग में भी अपना विशेष असर दिखाता है. मगर हम आज इसके एक गुण जो के शरीरक दर्द को हरने का है, उस पर चर्चा करेंगे, और बताएंगे की
इसमें ऐसे क्या गुण पाए जाते हैं जिस कारण से ये अति विशेष है।

आइये जानते हैं.

आक में पाए जाने वाले प्राकृतिक स्टेरॉयड , अल्कलॉइड , ट्रिटेरपेनोइड्स , कार्डेनॉइड्स और सैपोनिन ग्लाइकोसाइड पाए जाते हैं. आक में ये सब रसायन होने के कारण इसमें शरीर में हर हिस्से में दर्द को हरने की क्षमता पायी जाती है, विशेष रूप से गठिया का दर्द,, कमर दर्द, एड़ी का दर्द, अर्थात कोई भी मांस पेशियों और हड्डियों से सम्बंधित कैसा भी दर्द हो उसमे इसके निरंतर इस्तेमाल करने से आश्चर्यजनक परिणाम मिलते हैं.

सावधानी.

इन प्रयोग को करने से पहले आप ये ध्यान दें के इसके दूध की बूँद आँखों में नहीं जानी चाहिए अन्यथा आँखों में अंधापन आ सकता है.

आइये जानते हैं अभी विभिन्न दर्दों में विभिन्न प्रयोग.

एड़ी के दर्द में-

आक के 15 फूलों को एक कटोरी पानी में उबाल लीजिये, इसको उबालने के बाद फूलों को और पानी को अलग अलग कर लीजिये, अभी इस पानी से एड़ी को अच्छे से धुलाई करें। अभी इन फूलों को अच्छे से निचुड़ जाने के बाद कोई सूती कपडे की सहायता से एड़ी पर बाँध लों। और इसके ऊपर से जुराब और जूते पहन लें। ये प्रयोग आपको 10 से 15 दिन करें। काफी फर्क दिखने पर अगर ज़रूरत लगे तो इसको और भी निरंतर कीजिये।
आक के पत्ते को तवे पर गर्म कर लीजिये, इस पर हो सके तो तिल का तेल लगायें, अगर तिल का तेल ना मिले तो सरसों का तेल लगायें, अभी इस पत्ते को किसी कपडे की सहायता से एड़ी पर बाँध दीजिये, अभी इसको किसी चीज से गर्म सेक कीजिये,

उअके लिए किसी ईंट या पत्थर को चूल्हे पर गर्म कर लीजिये, इतना गर्म कीजिये जितना आप सहन कर सको अब इसको अभी पत्ते के ऊपर से ऐड़ी पर सेक कीजिये।
इस से पत्ते के अन्दर के रसायन एड़ी के दर्द वाली जगह के अन्दर तक जायेंगे , और वहां पर तुरंत ही आराम का अहसास होगा ये प्रयोग भी आप 10 से 15 दिन करें। काफी फर्क दिखने पर अगर ज़रूरत लगे तो इसको और भी आगे भी निरंतर कीजिये।

तीसरा सहज प्रयोग ये है के आक का दूध निकाल कर इसको एड़ी पर अच्छे से रगड़ें, इतना रगड़ें, के ये अन्दर तक अवशोषित हो जाए. थोड़े दिन ऐसा करने से इसमें आराम आ जायेगा. एक बार तो तुरंत भी असर दिखायेगा.

घुटनों के दर्द में-

घुटनों के दर्द में दोपहर में आक की ताज़ी डंडी से दूध निकाल कर इसको हलके हाथ से circular motion में मालिश करनी है जब तक ये पुरा अवशोषित न हो जाये . ऐसा दिन में दो बार करे ये प्रयोग भी आप 10 से 15 दिन करें. काफी फर्क दिखने पर अगर ज़रूरत लगे तो इसको और भी continue कीजिये.

कमर के दर्द में-

आक के दूध को थोड़े काले तिलो के साथ अच्छे से पीस ले। जब यह पतला लेप सा हो जाए तो उसे गर्म कर के दर्द वाले स्थान पर लगा कर अच्छे से मालिश करे जिस से ये तेल अवशोषित हो जाए और इसके बाद आक के पत्ते पर तिल का तेल या सरसों का तेल चुपड कर तवे पर गर्म करके इसको दर्द वाले स्थान पर बाँध लें। इस से शीघ्र ही लाभ होगा।

दोस्तों हम आपको बता दे की अगर दर्द एनीमिया की वजह से हो रहा है या फिर अगर दर्द फ्रैक्चर की वजह से तो ये बहुत धीरे धीरे असर करेगा.