मस्सों से केला सिर्फ एक दिन में दिलाएंगा निजात !

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हमारे चेहरे में मस्सा होना एक आम बात है। यह कोई बीमारी नही होती है, लेकिन कभी-कभी यह हमारे चेहरे में होने के कारण हम असहज महसूस करते है। हर कोई त्वचा संबंधी किसी न किसी समस्या से घिरा होता है। लेकिन इनमे से कुछ गंभीर होती है और कुछ नार्मल होती है।

मस्से शरीर के किसी भी अंग में हो सकते है। मुख्यत: ये हाथ, पैर, चेहरे, कलाई, घुटनों में हो सकते है। इसका मुख्य कारण ह्युमन पैपिल्लोमा वाइरस की वजह से होता है। यह कोई बडी समस्या नहीं होती है। इससे आप आयुर्वेद और घरेलू उपायों से निजात पा सकते है।

जानिए क्या है मस्सा

आमतौर पर मस्से पिगमेंट कोशिकाओं के समूह होते हैं, जो काले-भूरे रंग के होते हैं। लेकिन यह आपके लिए हानिकारक नहीं होते है, लेकिन अगर आपका इलाज नहीं कराया तो यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। कुछ मस्से आनुवांशिक होते हैं तो कुछ अधिक धूप में रहने के कारण हो जाते हैं। कुछ मस्से ऐसे होते हैं, जो उत्पन्न होकर अपने आप समाप्त हो जाते हैं। मस्से के काटने या फोड़ने पर इनके शरीर के अन्य हिस्सों में होने की आशंका बनी रहती है। कई लोग इससे निजात पाने के लिए सर्जरी भी कराते है। अगर आपके शरीर में भी अधिक मस्से है, तो आप केले का इस तरह इस्तेमाल कर इस समस्या से निजात पा सकते है।

अम्लबेत की पत्तियां

आमतौर पर इसका इस्तेमाल अम्लबेत की पत्तियों के रुप में किया जाता है। इसका इस्तेमाल कर आप इस समस्या से निजात पा सकते है। इसलिए लिए पत्तियों का पेस्ट बना लें। इसके लिए थोड़े से पानी में इस पत्तियों को पीस लें। दिन में 2 बार मस्सें में लगाएं। कुछ ही दिनों में आपको फर्क नजर आने लगेगा।

केला 

भारत में केला हर जगह पाया जाता है और केले की सबसे अच्छी किस्में भारत में ही होती है। केले की कई किस्में होती है परन्तु इनमें माणिक्य, कदली, मत्र्य कदली, अमृत कदली, चम्पा कदली आदि मुख्य है। जंगलों में अपने आप उग आने वाले केले को वन कदली कहते हैं। असम, बंगाल और मुम्बई में केले की अनेक किस्में पाई जाती है। सुनहरे पीले व पतले छिलके वाले केले खाने में स्वादिष्ट होते हैं। लाल केला लम्बा व फीका होता है। मोटे छिलके वाले तिकोने केले की सब्जी बनाई जाती है।

केला में भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व पाएं जाते है। जो कि हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी है। केले के छिलके में ऑक्सीकरण रोधी तत्व पाए जाते हैं जो मस्सों से निजात दिलाने के लिए मदद करता है। इसके लिए एक केले का छिलका लें और इसे बैंड-एड की तरह मस्से के ऊपर लगा लें। रात भर ऐसे ही लगा रहने दे। इससे आप सिर्फ एक दिन में मस्सों की समस्या से निजात पा सकते है।

प्याज

हम सभी ये बात अच्छी तरह से जानते है कि ये हमारी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है। इसका सेवन करने से आप कई बीमारियों से अपने शरीर को बचा लेते है। इसमें पाया जाने वाला एंटीवायरल और एंटीबैक्टेरियल तत्व मस्सों को काटकर उसे ठीक करने में मदद करता है।

विभिन्न रोगों में केले से उपचार 

सूजन: समस्त प्रकार की सूजन में केला लाभकारी होता है।

चोट या रगड़ लगना: चोट या रगड़ लगने पर केले के छिलके को उस स्थान पर बांधने से सूजन नहीं बढ़ती। पका हुआ केला और गेहूं का आटा पानी में मिलाकर गर्म करके लेप करें।

गैस्ट्रिक अल्सर:

  • गैस्टिक अल्सर के रोग से पीड़ित रोगी को दूध और केला एक साथ खाना चाहिए।
  • केले को खाने से आंतों की सूजन, आमाशय का जख्म, जठरशोथ, कोलिटिस की सूजन और अतिसार आदि की बीमारियों में लाभ मिलता है।
  • केला और दूध को सेवन करने से पेट के अल्सर में लाभ मिलता है।

हृदय का दर्द: 2 केले 15 ग्राम शहद के साथ मिलाकर खाने से हृदय का दर्द ठीक होता है।

मिट्टी खाना: अगर बच्चे को मिट्टी खाने की आदत हो तो पका हुआ केला शहद में मिलाकर खिलाना चाहिए। इसके सेवन से मिट्टी खाने की आदत छूट जाती है।

दादखाज: केले के गूदे को नींबू के रस में पीस लें और दाद, खाज व खुजली में लगाएं। इससे दाद, खाज, खुजली दूर होती है।

पेट का दर्द: किसी भी प्रकार के पेट दर्द में केला खाना लाभकारी होता है। केला बच्चों और दुर्बल लोगों के लिएं पोषक आहार है। दस्त, पेट का दर्द और आमाशय व्रण में भोजन के रूप में केला खाना लाभकारी होता है।

दस्त:

  • 2 केला लगभग 100 ग्राम दही के साथ कुछ दिन तक खाने से दस्त व पेचिश को ठीक करता है।
  • केले के पेड़ के तने को पीसकर, 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में रस निकालकर पीने से दस्तों का बार-बार आना बंद होता है।
  • कच्चे केले को उबालकर रोटी बनाकर अरूआ के भरते के साथ खाने से पुराना अतिसार रोग ठीक होता है।
  • केले और थोड़ा सा केसर दही में मिलाकर खाने से लाभ मिलता हैं।

मुंह के छाले: जीभ पर छाले होने पर एक केला गाय के दही के साथ सुबह के समय सेवन करने से लाभ होता है।

आग से जल जाना: आग से जल जाने पर केले को पीसकर लगाना लाभकारी होता है।

नाक से खून आना: 1 गिलास दूध में चीनी मिलाकर 2 केले के साथ प्रतिदिन 10 दिनों तक खाने से नाक से खून आना बंद होता है।

पेशाब का रुक जाना:

  • केले के तने का रस 4 चम्मच और घी 2 चम्मच मिलाकर पीने से बंद हुआ पेशाब खुलकर आता है। इसके सेवन से पेशाब तुरंत आ जाता है।
  • केले की जड़ के बीच के भाग वाले गूदे को पीसकर पेट के नाभि के नीचे तक लेप करने से बंद पेशाब खुलकर आने लगता है।
  • एक पका केला खाकर आंवले के रस में चीनी मिलाकर पीने से पेशाब की रुकावट दूर होती है।
  • केले के तने का रस गाय के मूत्र में मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है।

पेशाब का बार-बार आना:

  • प्रतिदिन खाना खाने के बाद दो पके केले खाने से पेशाब का बार-बार आना बंद होता है।
  • पका केला और आंवले का रस मीठे दूध के साथ सेवन करने से मूत्र रोग ठीक होता है।
  • पका हुआ केला, अमलतास, विदारीकन्द तथा शतावर को पीसकर दूध के साथ खाने से पेशाब का बार-बार आना बंद होता है।
  • पका हुआ 2 केला, एक चम्मच आंवले का रस और 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 4 से 5 दिनों तक पीने से बार-बार पेशाब आना रोग ठीक होता है।

उच्च रक्तचाप:

  • केले में पोटैशियम की अधिकता के कारण यह उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए विशेष लाभकारी होता है। केला खाने से उच्च रक्तचाप सामान्य बना रहता है।
  • प्रतिदिन एक पका केला खाली पेट खाने और ऊपर से इलायची के दो दाने चबाने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) सामान्य बनता है।

आन्त्रज्वर (टायफाइड): आन्त्रज्वर से पीड़ित रोगी को के लिए केला एक अच्छा भोजन है। इससे प्यास कम लगती है।

पित्त रोग: पका केला घी के साथ खाने से पित्त रोग मिटता है।

हिचकी:

  • जंगली कदली केले के पत्ते की राख 1 ग्राम को 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद होती है।
  • 3 ग्राम केले की जड़ को पानी के साथ घिसकर उसमें चीनी या मिश्री मिलाकर सेवन करने से हिचकी नहीं आती है।

पेडू़: कदली के पेड़ के गर्भ का रस निकालकर पीने से पेडू में पहुंचे हुए जहर दूर हो जाते है।

जलन: केले और कमल के पत्तों पर सोने से शरीर की जलन शांत होती है।

पेचिश: केले को नींबू के साथ खाने से पेचिश रोग मिटता है और आहार शीघ्र ही पचता है। केले में दही मिलाकर खाने से पेचिश और दस्तों में लाभ होता है।

प्रदर: पके केले, आंवलों का रस और शर्करा इकट्ठा कर स्त्रियों को पिलाने से प्रदर और बहुमूत्र मिटता है।