लद्दाख के युवा सांसद ने पहली बार में ही संसद भवन को हिला दिया

103

लद्दाख के युवा सांसद ने पहली बार में ही संसद भवन को हिला दिया

लद्दाख से भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने लोकसभा में अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी करने और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने के मोदी सरकार के फैसले का स्वागत किया। जम्मू-कश्मीर पर गृहमंत्री अमित शाह की ओर से पेश संकल्प पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कांग्रेस सहित कुछ अन्य दलों पर लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग-थलग रखने और उसके साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया। नामग्याल ने कहा, ‘लद्दाख दशकों से भारत का अटूट अंग बनना चाहता था। वह केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग रख रहा था, लेकिन कांग्रेस ने इस पर कभी सुनवाई नहीं की। आज मोदी सरकार ने इस सपने को पूरा किया है। मोदी है तो मुमकिन है।’

नामग्याल ने कहा, ‘तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह जब लेह पधारे थे, तब क्षेत्र के हर राजनीतिक दल और धार्मिक संगठन के प्रतिनिधियों ने उनसे एक आवाज में कहा था कि हमें सिर्फ केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा चाहिए।’इस पर विपक्षी सदस्यों ने उन्हें टोकने की कोशिश की तो नामग्याल बोले, ‘सुनने की क्षमता रखिए, अभी तो सिर्फ ट्रेलर है।’पूरा सदन उनकी टिप्पणी पर ठहाकों से गूंज उठा।

-नामग्याल ने किसी का नाम लिए बिना जम्मू-कश्मीर में वंशवाद की राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘कश्मीर से मेरे साथी सांसद पूछ रहे थे अनुच्छेद 370 हटने से क्या खोएंगे? मैं एक चीज जरूर कहना चाहूंगा। एक चीज जरूर खोएंगे। दो परिवारों की रोजी-रोटी खोएंगे, पर कश्मीर का भविष्य उज्ज्वल होने वाला है। ये दो परिवार कश्मीर मुद्दे का समाधान नहीं चाहते। वे खुद समस्या का हिस्सा बन गए हैं। वे कश्मीर को अपनी जागीर समझते हैं।’

नामग्याल ने कहा, कुछ लोग बोल रहे कि अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी होने से जम्मू-कश्मीर में समानता की भावना खत्म हो जाएगी। लेकिन फंड से लेकर नौकरियों तक में लद्दाख से भेदभाव किया जाता है। उन्होंने कहा कि 2011 में कांग्रेस नीत सरकार ने जम्मू और कश्मीर को दो केंद्रीय विश्वविद्यालय दिए, लेकिन लद्दाख की उच्च शिक्षा संस्थान की मांग पूरी नहीं की। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद क्षेत्र को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय मिला।

लद्दाख से भाजपा सांसद ने कहा, जो लोग धर्मनिरपेक्षता की बात करते हैं, उन्होंने अनुच्छेद 370 का दुरुपयोग करते हुए कश्मीरी पंडितों को घाटी से बाहर निकाला। बौद्धों को निष्प्रभावी करने की कोशिश की गई। लद्दाख की भाषा, संस्कृति अगर लुप्त होती चली गई तो इसके लिए अनुच्छेद 370 और कांग्रेस जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, विपक्ष के लोग बार-बार करगिल की बात करते हैं, लेकिन उन्हें जमीनी हकीकत नहीं पता। करगिल की 70 प्रतिशत जनता लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन कर रही है।

भाषण के दौरान नामग्याल ने कहा, ‘कुछ लोग रो रहे कि हमारा झंडा जा रहा। आपका झंडा तो लद्दाख वालों ने 2011 में ही नकार दिया था। लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद ने प्रस्ताव पारित कर अपनी गाड़ियों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने का प्रावधान किया क्योंकि हम भारत का अटूट हिस्सा बनना चाहते थे।’नामग्याल ने आगे कहा, ‘आन देश की, शान देश की, देश की हम संतान हैं, तीन रंगों से रंगा तिरंगा अपनी यह पहचान है।’उनकी इन पंक्तियों पर सदन में ‘भारत माता की जय’के नारे लगने लगे।

नामग्याल के भाषण के दौरान गृहमंत्री अमित शाह कई बार मुस्कराते और मेज थपथपाते नजर आए।
लोकसभा में लद्दाख और अनुच्छेद 370 पर दिए अपने भाषण से नामग्याल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी दिल जीत लिया। मोदी ने ट्विटर पर नामग्याल के भाषण की तारीफ करते हुए लिखा, ‘मेरे युवा दोस्त, लद्दाख से सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने जम्मू-कश्मीर पर महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान शानदार भाषण दिया। लद्दाख के हमारे भाइयों और बहनों की आंकाक्षा को सुसंगत रूप से प्रस्तुत किया। इसे अवश्य सुना जाना चाहिए।’